कांग्रेस के दिग्गज नेता और सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने एक गलत बयान के कारण विपक्ष के निशाने पर आ गए है। जिसके लिए उन्हें माफ़ी तक मांगनी पड़ी।

दरअसल, ज्योतिरादित्य सिंधिया संसद में अपना भाषण दे रहे थे। उसी दौरान उन्होंने एक गलत उर्दू के शब्द का उपयोग कर लिया जिससे उनकी बात का मतलब ही बदल गया। फिर कुछ समय बाद उन्हें एहसास हुआ की उन्होंने जिस शब्द का चयन किया है वह पूर्णतः गलत है।

सिंधिया ने अपने भाषण में कहा था की ‘आज कश्मीर की जरूरत है कि रायशुमारी होनी चाहिए। जो वहां जख्म लगे हैं, उन जख्मों को जंजीरों की कड़ाई से नहीं बल्कि इंसानियत से हमें भरना होगा। एक अमन चैन का वातावरण बनाना होगा, उनके द्वार हमें खोलने होंगे, तभी वह चमन हमारे देश में खिल पायेगा।’

सिंधिया ने उर्दू शब्द “रायशुमारी” का उपयोग किया था जिसका मतलब जनमत संग्रह होता है। ऐसे में उनके भाषण का अर्थ निकलता है की कश्मीर में जनमत संग्रह होना चाहिए। वहीँ आपको बता दे की कश्मीर में जमे जकड़े अलगाववादी संगठन भी कश्मीर में जनमत संग्रह कराने की मांग कर रहे है। ऐसी स्थिति में सिंधिया पर यह भी आरोप लग रहे थे की वे अलगाववादियों की तरह बोल रहे है अथवा उनका समर्थन कर रहे है।

पर आपको बता दे की सिंधिया को जैसे ही अपनी गलती का अहसास हुआ वैसे ही उन्होंने ट्वीट करके माफ़ी मांगी और कहा की “मेरी ग़लती, मुझे चर्चा के लिए उर्दू का गलत शब्द दिया गया और गलत समझा गया। मैंने कश्मीर में जनमत संग्रह की बात नहीं की। मेरा पूरा भाषण पढ़ें।”

सिंधिया ने लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन को पत्र लिख कर अपने बुधवार के भाषण से ‘रायशुमारी’ शब्द को हटा कर उसकी जगह ‘चर्चा’ लिखने का अनुरोध किया है। और स्पीकर ने इसे मान भी लिया।

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