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Monday, May 10, 2021

विंध्य में कोरोना से लड़ाई में लापरवाह व नाकाम है शिवराज सरकार :-सिद्धार्थ तिवारी

रीवा लोकसभा से कांग्रेस के प्रत्याशी रहे सिद्धार्थ तिवारी राज ने रीवा समेत संपूर्ण विंध्य में चौपट स्वास्थ्य व्यवस्था पर निशाना साधते हुये कहा है कि कोरोना रीवा समेत विंध्य को तेजी अपने गिरफ्त में ले चुका है लेकिन न तो शिवराज सरकार विंध्य के बिगड़े हालातो को लेकर फिक्रमंद दिख रही है न ही विंध्य के भाजपाई प्रतिनिधि चिंतित हैं।

तिवारी ने कहा कि एक साल से ज्यादा समय से देश कोरोना की चपेट में है लेकिन सरकार के पास अब तक कोई कारगर रणनीति नहीं है। इसका कारण है कि कोरोना की पहली लहर में जनता की फिक्र छोड़ विंध्य के भाजपा नेता सत्ता की हवस को पूरा करने के लिये विधायको की खरीद फरोख्त में लगे रहे तो दूसरी लहर में पद की लालसा में शिवराज परिक्रमा में व्यस्त रहे।

जिसका खामियाजा विंध्य की जनता को भुगतना पड़ रहा है। और सरकार एवं जनप्रतिनिधियों के इस ओर ध्यान ना देने की वजह से हालात बिगड़ रहे हैं।

तिवारी ने आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार व विंध्य के भाजपा नेता कोरोना की लड़ाई में लापरवाह हैं और नाकाम साबित हुए हैं, उनका व्यवहार गैर जिम्मेदाराना और निर्दयता पूर्ण है।

तिवारी ने कहा आज कोरोना की दूसरी लहर ने बड़ी विविध व गहन तरीके से हमारे नागरिकों पर आक्रमण कर रखा है परंतु सरकार सोई पड़ी है और पूर्णतः उदासीन है।

तिवारी के मुताबिक साल भर पहले कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल के साथ कोविड के खिलाफ युद्ध को लेकर हमने सरकार को महत्वपूर्ण सुझाव सौपे थे लेकिन अहंकारी व असंवेदनशील सरकार ने इन्हें दरकिनार कर दिया अगर सुझावों पर अम्ल किया गया होता तो आज हालात बद से बदतर नही होते।

तिवारी ने कहा शहडोल में ऑक्सीजन की कमी चलते दर्जन भर परिवारों ने अपने प्रियजनों को खो दिया,मरते विंध्यवासियों, रोते-बिलखते परिजनों और दर-दर की ठोकर खा रहे ग़रीबों का दुःख-दर्द देखकर भी विंध्य के रहनुमाओं की रूह नहीं कांप रही है।

तिवारी ने कोरोना संकट के एक वर्ष बीत जाने पर सरकार से सवाल किया है कि हेल्थ इंफ़्रास्ट्रक्चर को कितनी मजबूती दी?, पीएम केयर्स फंड का कहाँ सदुपयोग हुआ?, आरोग्य सेतु एप्प कितना कारगर हुआ?, टीकाकरण की गति कछुआ चाल क्यों है?, वेंटिलेटर,ऑक्सीजन,जरूरी दवाओं,बेड और संजीदगी की कमी क्यों है?

टीकाकरण की आयुसीमा पर पुनर्विचार करे सरकार

कांग्रेस नेता ने कहा कि सरकार को टीकाकरण के लिए अपनी प्राथमिकता पर पुनर्विचार करना चाहिए और आयुसीमा को 45 से घटाकर 25 साल करना चाहिए। अस्थमा, मधुमेह, किडनी और लीवर संबंधी बीमारियों से पीड़ित सभी युवाओं को टीका लगाया जाना चाहिए।” ।

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