Monday, August 2, 2021

मध्यप्रदेश की डायल 100 सेवा में हो रहा घोटाला, अधिकारियों के संरक्षण में नहीं हो पा रहा ठेका

मध्यप्रदेश की पुलिसिंग व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा Dial 100 योजना की शुरुआत की गई थी जिसका उद्देश्य पुलिस से मदद मांगने वालों को त्वरित उनकी जगह पर पहुँचकर उन्हें सहयोग करना था। लेकिन प्रदेश सरकार के अधिकारियों ने इसे भी अपनी कमाई का जरिया बना लिया है।

एक ऐसा ही मामला प्रदेश में Dial 100 का संचालन करने वाली कंपनी बीवीजी(BVG India Limited) को लेकर सामने आया है जिसमे प्रदेश सरकार के अधिकारियों ने कंपनी को ठेका की कार्यावधि पूर्ण होने के वावजूद भी अपने वित्तीय लाभ के लिए लगातार 14 महीने से एक्सटेंशन देकर रखा है।

आपको बता दें कि Dial 100 का संचालन करने वाली कंपनी BVG और प्रदेश सरकार के बीच 5 साल के लिए अनुबंध हुआ था जो 5 अप्रैल 2015 से लेकर 4 अप्रैल 2020 तक का था। जिसके बाद पुनः नए सिरे से टेंडर की प्रक्रिया होनी चाहिए थी लेकिन सरकार के भ्रष्टाचारी अधिकारियों ने कंपनी से सांठगांठ करके दोबारा टेंडर बुलाने की जगह इसी BVG को एक्सटेंशन दे दिया जो बीते 14 माह से चल रहा है।

अब ऐसे में सवाल यह है कि कंपनी जिसके पास प्रदेश की सुरक्षा से जुड़े मामले हैं उसे नियमविरुद्ध तरीके से किसके कहने पर संरक्षण दिया जा रहा है और कौन इस पैसे का बंदरबांट करके वित्तीय लाभ ले रहा है और प्रदेश सरकार को चूना लगा रहा है।

विवादों में रही है BVG India Limited

BVG कंपनी को जब से Dial 100 का ठेका मिला है तभी से वह विवादों से घिरी रही है। सरकार ने अपने अनुबंध में कंपनी से 1000 गाड़ियों की सेवा का एग्रीमेंट किया था लेकिन कंपनी के अधिकारियों ने प्रदेश सरकार के उच्च पदस्थ लोगों के साथ सांठगांठ करके सिर्फ 600 गाड़ी हीं मुहैया करवाई थी उसमें भी कई ऐसी गाड़ियां शामिल थी जो हमेशा खराब भी रही आती थी लेकिन प्रशासनिक दवाब के चलते कंपनी का कोई कुछ नही बिगाड़ पाया।

जयपुर में रिश्वत देते वायरल हुए थे BVG के प्रतिनिधि

BVG कम्पनी किस कदर भ्रस्टाचार में लिप्त इसकी एक बानगी बीते दिनों देखने को मिली थी जब इस कंपनी का प्रतिनिधि पड़ोसी राज्य राजस्थान के जयपुर में महापौर पति को 20 करोड़ की रिश्वत का सौदा करते हुए कैप्चर पकड़े थे और वीडियो जमकर वायरल हुआ था लेकिन इसके वावजूद भी प्रदेश में इस कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने की हिम्मत मध्यप्रदेश सरकार ने नही दिखाई।

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