4 पुश्तों का बदला सबको राहुल गांधी से ही लेना है, जबकि इस पूरी फैमिली में कोई इतना नहीं झुका जितना राहुल गांधी झुका है, फिर भी 1955 से लेकर 2014 तक का पूरा हिसाब सबको राहुल गांधी से चाहिए, क्यों भाई ?

जो करने वाले थे वो गए, जो वोट देने वाले थे वो गए, उन्होंने कभी नहीं कहा सरकार ने हमारे लिए कुछ नहीं कहा और जो कह रहे हैं उन्होंने आपके लिए क्या किया बताइये ?


मुझे ये बताइये कि राहुल का मतलब मस्करा है क्या ?
राहुल गांधी का जिक्र होते ही हंसी क्यों आती है ?

अब कोई मां बाप अपने बच्चे का नाम राहुल नहीं रखना चाहते हैं क्यों ? जबकि जिनका नाम राहुल है उनके तो माता पिता ने बहुत उम्मीदों से ये नाम रखा था ।

मुझे बताइये आपकी उम्मीदों को आपसे किसने छीना है ?
किसने IT सेल को अपनी सत्ता के लिए हथियार बनाया ?

आप थोड़ी देर के लिए अपने माता पिता और दादा दादी के ज़माने में जाइये फिर याद कर के बताइये क्या इस इंसान का, इस परिवार का मजाक ऐसे ही उड़ता था ?

नहीं बिल्कुल नहीं लेकिन आज ऐसा हो रहा है क्यों ?

क्यों कि सियासत ने आपको वीडियो दिखाकर उलझा दिया है और आप इसी में मगन हैं, 60 सालों का हिसाब मांगने में व्यस्त हैं, जबकि आपके माता पिता दादा दादी ने ऐसा कभी नहीं कहा क्योंकि उन्होंने देखा है इंदिरा गांधी के जादुई नेतृत्व को, जो बांग्लादेश और पाकिस्तान को आंख दिखाकर जीत ले, यहाँ बैठकर डींगें ना मारे ।

राहुल गांधी से नफरत करने वालों से मेरा सवाल है कि देश में नफरत के बीज कौन बो रहा है ?

हम 2 + 2 का मतलब 4 ही समझते हैं, मर भी रहे हों तो वही समझेंगे लेकिन मुझे ये बताइये कि इसकी क्या गारंटी है कि हर पढ़ा लिखा, डॉक्टर या इंजीनियर ट्रैफ़िक रूल्स का पालन करता ही है, ये इस बात का गवाह है कि हमारी टीचिंग तो अच्छी हुई है लेकिन लर्निंग बेकार है, हम पढ़ तो बहुत अच्छा रहे हैं लेकिन हमारी सीखने की क्षमता बेकार है और जो आपको पढ़ा रहा है ना वो देश को जानवर बना रहा है ।

लेखक वरिष्ट पत्रकार है और वर्तमान में हिन्दी न्यूज चैनल ‘न्यूज नेशन’ में कार्यरत है

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