कर्नाटक में बिना बहुमत के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले येदुरप्पा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट में कांग्रेस और जेडीएस ने राज्यपाल के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें राज्यपाल ने कर्नाटक में सरकार गठन के लिए बीजेपी को न्यौता दिया था। कांग्रेस की ओर से बहस करने के लिए कोर्ट में वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल मौजूद थे। वहीं मुकुल रोहतगी बीजेपी का पक्ष रख रहे थे।

कोर्ट ने शनिवार को बीजेपी से बहुमत साबित करने की बात कही, लेकिन बीजेपी ने इसका विरोध किया। ऐसे में कोर्ट ने बीजेपी से पूछा कि आखिर कल बहुमत परीक्षण क्यों नहीं हो सकता। वहीं कांग्रेस के वकील अभिषेक मनु सिंंघी कल बहुमत परीक्षण के लिए तैयार थे। बहस के दौरान कांग्रेस के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि राज्यपाल कैसे बीजेपी को बहुमत सिद्ध करने का मौका दे सकते हैं, जबकि कांग्रेस-जेडीएस के पास पूरी संख्या है। सिंघवी ने यह भी कहा कि अगर कल बहुमत परीक्षण के लिए सदन को बुलाया जाता है, तो भी इस मामले में कानून सम्मत फैसला होना चाहिए कि क्या इस मामले में राज्यपाल फैसला ले सकते हैं।

जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस-जेडीएस विधयकों को सुरक्षा देने का आदेश दिया। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने विधानसभा में एंग्लो-भारतीय विधायक को नामित करने के राज्यपाल के फैसले पर रोक लगा दी।

सुप्रीम कोर्ट ने कल यानी शनिवार को शाम 4 बजे बहुमत परीक्षाण का आदेश दिया है। कोर्ट में सुनवाई के दौरान बीजेपी कल बहुमत परीक्षण कराने के पक्ष में नहीं थी। लेकिन कांग्रेस-जेडीएस इसके लिए तैयार थे।

जिसके बाद कांग्रेस नेता और वकील अभिषेक मनु संघवी ने कहा कि ‘सुप्रीम कोर्ट के फैसले से साबित हो गया कि येदियुरप्पा के पास विधायकों की पर्याप्त संख्या नहीं है।येदियुरप्पा की तरफ से राज्यपाल को दिए गए जो पत्र सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए उसमें लगता है कि सरकार बनाने के लिए जरूरी विधायकों का सर्मथन नहीं था। इसीलिए हमें भरोसा है कि हम 100 फीसदी इस परीक्षण को जीतेंगे।