image

भोपाल सेंट्रल जेल से फरार हुए सिमी कार्यकर्ताओं को जेल से तकरीबन 10 किलोमीटर दूर पुलिस ने मुठभेड़ में मारे जाने का दावा किया है।

इस ख़बर के देश भर में फैलने के बाद तमाम न्यूज़ पोर्टल और पत्रकारों ने सवाल खड़ा शुरू किया ही था कि इस बीच सीपीआई नेता अमीक जामेई ने सिमी कार्यकर्ताओं के एंकाउंटर को साजिश बताया है।

अमीक जामेई देश मे निर्दोष मुस्लिम युवाओ की रिहाई की तहरीक मे शामिल रहें हैं और पिछले कई महीनो से जेलों में बंद निर्दोष युवाओ से देश में मुलाक़ात करते रहें हैं।

Also Read: 13 तथ्य जो भोपाल में हुए 8 आतंकियों के एनकाउंटर को फर्जी साबित कर रहे है !

जामेई का कहना हैं कि भोपाल सेन्ट्रल जेल में कुछ कैदी अगली अदालत की तारीखों मे छूटने वाले थे क्योंकि इनके खिलाफ दर्ज मामलो में पुलिस पुख्ता सबूत नहीं जुटा पाई थी।

अमीक जामेई ने आगे बताया कि ‘मैं हाल में जयपुर व जोधपुर के केंद्रीय कारागार मे बंद निर्दोष युवाओ से मिलने गया था और तजर्बे के आधार पर कह सकता हूँ कि आतंक के आरोप में बंद किसी भी कैदियों की जेलों में सुरक्षा व्यवस्था इतनी सख्त होती है कि बिना किसी साजिश के कोई परिंदा भी वहां पर नहीं मार सकता। उन्होंने ने कहा कि ऐसे इल्ज़ाम मे बंद क़ैदियो की बैरक पर सीसीटीवी कैमरे की नज़र होती है।

जामेई ने कहा कि इन युवाओं का नाम सिमी से जोड़कर फंसाने वाले अधिकारी बेनकाब होने वाले थें इसलिए उन्होंने खुद को बचाने के लिए पहले इन्हें गोलियों से भुना फिर गोली मारकर मुठभेड़ का नाम दे दिया।

उन्होंने ने कहा कि आला अधिकारियों के इस षड्‍यंत्र में पुलिस के एक गार्ड को भी अपनी नौकरी से हाथ धोना पडा।

जामेई ने मांग किया है कि सेन्ट्रल जेल में लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज शिवराज सरकार देश के सामने रखे।