Newbuzzindia :उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर कई दर्जन अपराधिक मामले अदालतों में चल रहे है। लेकिन अब उनके ही मंत्रालय में उनके ही अपराधों की फाइल पहुंची हैं। पुलिस ने उन आरोपियों पर आधिकारिक मुकदमा चलाने की इजाजत मांगी है जिसमें खुद योगी आदित्यनाथ भी आरोपी हैं।

इसके बाद पुलिस ने मंत्रालय से आदित्यनाथ समेत गोरखपुर के एम.एल.ए. राधामोहन दास अग्रवाल और भाजपा के राज्य सभा सांसद शिवप्रताप शुक्ला पर आईपीसी की धारा 153-A (धर्म के आधार पर दो समुदायों के बीच हिंसा भड़काने) के तहत चार्जशीट दायर करने की अनुमती मांगी है। यह मामला दस साल पहले गोरखपुर में हुई साम्प्रदायिक हिंसा से जुड़ा है।

खबरों के मुताबिक, महिला से छेड़छाड़ होन के बाद, आरोपी लड़कों का कुछ दूर तक पुलिस ने पीछा किया था लेकिन लड़के मोहर्रम के जुलूस का फायदा उठाकर भीड़ में शामिल गए। इसी बीच मोहर्रम के जुलूस में फायरिंग भी हुई जिसमें कुछ लोग घायल हुए। इसके बाद दो समुदायों के बीच हिंसा फैल गई थी।

इसके बाद परवेज परवाज नाम के एक पूर्व पत्रकार ने एफआईआर दर्ज कराने की कोशिश की थी, लेकिन पुलिस ने ऐसा करने से मना कर दिया। बाद में हाईकोर्ट मामले में दखल दिया तब जाकर 26 सिम्बर 2008 को एफआईआर दर्ज हुई।

एफआईआर के मुताबिक, योगी आदित्यनाथ पर आरोप है कि उन्होंने दो समुदायों के बीच हिंसा भड़काया और उन्हें आपस में लड़ाने के लिए भड़काऊ भाषण दिए। उसके बाद उन्होंने हिंदू युवक की मृत्यु के बदले की बातें कही थीं।

वहीं दूसरी तरफ पत्रकार परवेज का दावा है कि उसके पास मुख्यमंत्री आदित्यनाथ के कथित रूप से दिए गए भड़काऊ भाषण की वीडियो फुटेज है जिसे उन्होंने कर्फ्यू लगने दौरान दिया था।

परवेज का यह भी दावा है कि आदित्यनाथ के साथ उस समय गोरखपुर के एम.एल.ए. राधामोहन दास अग्रवाल, भाजपा के राज्यसभा सांसद शिवप्रताप शुक्ला के अलावा शहर के मेयर अंजु चौधरी और पूर्व भाजपा एमएलसी वाय. डी. सिंह भी मौजूद थे।