.Newbuzzindia: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए शहरों का चयन प्रतिस्पर्धा के आधार पर किया गया था। प्रतिस्पर्धा में आधार आम लोगों की राय को बनाया गया था। इस राय के आधार मध्यप्रदेश के भोपाल शहर का चयन आखिरी बीस नंबर पर हुआ है। इस बीसवें नंबर को हासिल करने के लिए राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर फर्जी ई-मेल खाते बनाकर आॅनलाइन राय दर्ज कराई गई। सरकार का यह कृत्य चार सौ बीसी की श्रेणी में आता है।

आईपीसी की धारा 120बी भी इसमें लगती है। तथ्यों को छुपाने अथवा तोड़ने-मरोड़ने का भी अपराध बनता है। इस अपराध की श्रेणी में आते हैं भोपाल नगर निगम के महापौर आलोक शर्मा और तत्कालीन आयुक्त तेजस्वी नायक। इन दोनों की शह पर ही नगर निगम भोपाल के कर्मचारियों ने फर्जी ई-मेल खाते बनाकर भोपाल के तुलसी नगर एवं शिवाजी नगर इलाके को स्मार्ट सिटी बनाने पर आम जनता की सहमति के रूप में दर्ज कर दिया।

पिछले साल जून माह में शहरी विकास मंत्रालय द्वारा स्मार्ट सिटी के बारे में जो निर्देश जारी किए गए थे, उसमें यह स्पष्ट तौर पर कहा गया था कि स्मार्ट सिटी के प्रस्ताव में नगरवासियों एवं हितधारकों के साथ किए गए परामर्शों को रेखांकित किया जाएगा। जिन दिनों नगर निगम भोपाल शहर को स्मार्ट सिटी में शामिल करने के लिए विभिन्न स्तरों पर विशेषज्ञों से मशविरा कर रहा था, उस वक्त स्थान के नाम को गोपनीय बनाए रखने में अत्यधिक सतर्कता बरती गई।

भोपाल के लोगों की कल्पना में भी यह नहीं था कि भारतीय जनता पार्टी के नेता और उसके अफसर एक ऐसे क्षेत्र को पुनर्विकास मॉडल में शामिल कर लेंगे, जो पूर्व से काफी स्मार्ट इलाका माना जाता है। सरकार और नगर निगम ने संभवत: इस कारण क्षेत्र के लोगों से मशविरा करना जरूरी नहीं समझा, क्योंकि वे सरकारी कर्मचारी हैं। आला अफसरों का मानना है कि सरकारी कर्मचारियों से राय लेने की जरूरत ही नहीं थी।

तुलसी नगर एवं शिवाजी नगर के आवास सरकारी हैं। सरकार इन मकानों के मामले में स्वतंत्र रूप से निर्णय ले सकती है? शहरी विकास मंत्रालय ने स्मार्ट सिटी बनाने के लिए तीन मॉडल प्रस्तावित किए थे। इसमें भोपाल के लिए पुनर्विकास का मॉडल ही सरकार ने क्यों चुना? इस सवाल का जवाब सरकार दे चुकी है। सरकार की योजना इलाके की जमीन को निजी हाथों में बेचने की है। जमीन बेच कर स्मार्ट सिटी को विकसित किया जाए, यह केन्द्र सरकार की योजना का हिस्सा नहीं है।

पुनर्विकास के मॉडल के लिए केन्द्र सरकार ने मुंबई के भिंडी बाजार और दिल्ली में पूर्वी किदवई नगर का उदाहरण दिया था। क्या भिंडी बाजार लगा रखा है? इस तरह का जुमला मुंबई के भिंडी बाजार को लेकर नकारात्मक तौर पर प्रयोग किया जाता है। मुंबई का भिंडी बाजार अर्थात भीड़भाड़ वाला इलाका और तंग गलियां। इलाके कई जगह ऐसे थे, जिन्हें मरम्मत की जरूरत थी। संकरे रास्तों पर चलना मुश्किल था। बच्चे खेलने के लिए बाहर नहीं जा सकते थे। महिलाएं भी प्रार्थना के लिए बाहर नहीं निकल सकती थीं। टैक्सी ड्राइवर भी इस इलाके की सवारी नहीं लेते।

क्या भोपाल का तुलसी नगर और शिवजी नगर इस श्रेणी में आता है? भिंडी बाजार में 18वीं सदी में गुजरात से मुंबई आए दाऊदी बोहर समाज के लोग रहते हैं। 1803 में अंगे्रजों ने यहां बसाया था। अवैध कब्जों पर ध्यान न दिए जाने के कारण इलाके की हालत बिगड़ गई। लगभग 16.5 एकड़ क्षेत्र के इस इलाके का तीन हजार करोड़ रुपए खर्च कर विकास किया जा रहा है। इसके लिए इलाका खाली कराकर लोगों को कैंप में भेजा गया है। यह परियोजना बिना मुनाफे वाली है।

इस क्षेत्र में कुल 3200 घर हैं। लगभग बीस हजार लोग रहते हैं। लगभग हर परिवार को एक पैसा खर्च किए बगैर आधुनिक सुसज्जित मकान पुनर्विकास के बाद दिया जाएगा। परियोजना सैफी बुरहानी अपलिफ्टमेंट ट्रस्ट द्वारा संचालित है। भोपाल का तुलसी नगर और शिवाजी नगर का इलाका केन्द्र द्वारा दिए गए मॉडल से मेल नहीं खाता है। तुलसी नगर और शिवाजी नगर 1960 में बनकर तैयार हुआ था।

56 साल बाद भी यह इलाका राज्य का सबसे बेहतर इलाका माना जाता है। न तो ट्रैफिक का दबाव है और न ही प्रदूषण की समस्या है। स्मार्ट सिटी के जो सूचकांक केन्द्र सरकार द्वारा तय किए गए हैं, उनमें नब्बे प्रतिशत यहां पहले से ही मौजूद हैं। चंद करोड़ रुपए खर्च करके इलाके को देश का सबसे बेहतर इलाका बनाया जा सकता है। केन्द्र सरकार ने स्मार्ट सिटी में कुल दस सूचकांक तय किए हैं। (देखें बाक्स) इलाके में गरीबों के लिए आवास पहले से ही बने हुए हैं। पर्याप्त जल आपूर्ति भी और विद्युत आपूर्ति भी।

इलाके में अस्पताल भी है और स्कूल भी। मंत्रालय के नजदीक बसा हुआ है। जहां तक सवाल आॅनलाइन नागरिक सेवाओं का है तो वह पूरे शहर के लिए ही स्थापित होंगी। यह समझ से परे है कि शिवराज सिंह चौहान की सरकार केन्द्र से मिलने वाली र

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