प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की मौजूदगी में भाजपा के वरिष्ठ सांसद भोला सिंह ‘स्मार्ट सिटी’ की उपयोगिता पर सवाल उठाया। लोकसभा में भोला सिंह ने कहा कि इससे पहले से विकसित शहरों का ही विकास होगा। पिछड़े शहरों और अति विकसित शहरों के बीच खाई बढ़ेगी और विषमताओं के पहाड़ खड़े होंगे।

प्रश्नकाल के दौरान भोला सिंह ने मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना ‘स्मार्ट सिटी’ की प्रासंगिकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस स्मार्ट सिटी की बात सरकार कर रही है, नगर निगम, नगर पालिका परिषद और तमाम ऐसी नगर विकास एजेंसियां सालों से यह काम पहले ही कर रही हैं।
भोला सिंह ने कहा कि इसी प्रकार जिस ‘सबका साथ, सबका विकास’ की बात प्रधानमंत्री ने की है उसमें स्मार्ट सिटी का उद्देश्य कोई नया नहीं है। नगरपालिकाएं सालों से यही काम करती आ रही हैं।

तो नगरपालिकाओं की शहरी योजना और केंद्र की इस नई योजना में क्या अंतर है? उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार इस योजना के लिए करोड़ों रुपये का ऋण देगी, फिर उस ऋण को वसूलेगी, आखिर यह सब कब तक चलेगा। इस सवाल के जवाब में शहरी विकास मंत्री एम वेंकैया नायडू ने कहा कि परियोजना के तहत 100 स्मार्ट शहरों को ‘प्रकाश पुंज’ की तरह विकसित करना है ताकि बाकी शहर उनका अनुकरण करें।

उन्होंने भोला सिंह के इस विचार से असहमति जताई कि इस योजना से समृद्ध क्षेत्र अधिक समृद्ध होंगे। उन्होंने कहा कि इसके लिए खुली प्रतिस्पर्धा के तहत शहरों का चयन किया गया है और केंद्र यह ध्यान भी रखेगा कि क्षेत्रीय संतुलन बना रहे।

नायडू ने भोला सिंह की इस टिप्पणी को भी गलत बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कभी यह कहा था कि पूर्व के पास दिमाग है लेकिन दौलत नहीं जबकि पश्चिम के पास दौलत है दिमाग नहीं। उन्होंने कहा कि देश के सभी क्षेत्र ज्ञानवान हैं। उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री ने कभी ऐसा नहीं कहा।’ उस समय प्रधानमंत्री सदन में मौजूद थे।

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