• डोकलाम में मोदी का डंका
  • डोकलाम में प्रधानमंत्री की जीत
  • प्रधानमंत्री मोदी की कूटनीतिक जीत
  • मोदी के आगे झुका चीन

      अगस्त-सितंबर में देश की मीडिया कुछ ऐसी ही हेडलाइनों से भरा पड़ा था। डोकलाम में हुए विवाद के बाद भारतीय सेना और चीनी सेना तकरीबन 2 महीने से ज्यादा आमने सामने खड़े रहे। जंग के हालात के बीच दोनो देशों की सरकार पीछे हटने को तैयार नही थी। 

      चीन की तरफ से बार बार धमकियां मिल रही थी लेकिन भारतीय सेना भी अपनी जगह डटी रही। तकरीबन 2 महीने चले इस विवाद के बाद दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय बातचीत हुई और दोनों ही सेना डोकलाम से वापिस चली गयी। 

      देश के लिए यह बहुत बड़ी जीत थी। प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा इस मुद्दे को भुनाने में कामयाब रहे। हर जगह पीएम मोदी की तारीफ होने लगी। मीडिया और बीजेपी इसे प्रधानमंत्री मोदी की कूटनीतिक जीत बता रही थी। 

      धीरे-धीरे मामला पुराना हो गया। मीडिया को भी जीएसटी, बाबा रामरहीम, गुजरात चुनाव और पद्मावती जैसे नए मुद्दे मिल गए। जनता भी इन मुद्दों के बीच डोकलाम को भूल गयी। 

      चीन है कि मानता नही



      डोकलाम विवाद को शांत हुए 4 महीने से ज्यादा हो चुका है लेकिन खबर आ रही है कि चीनी सेना एक बार फिर डोकलाम में कब्ज कर बैठ गयी है। खबर है कि चीनी सेना डोकलाम में टैंक और मिसाइल के साथ कब्जा जमा चुकी है। कुछ दिनों पहले अंग्रेजी न्यूज़ वेबसाइट ThePrint.com ने अपनी रिपोर्ट में अंतरराष्ट्रीय सैटलाइट की तस्वीरें जारी की थी। तस्वीरों में दिखाया गया कि चीनी सेना ने रोड और घर बना रखे है। 

      मीडिया में रिपोर्ट आने के बाद भाजपा ने डोकलाम विवाद पर सफाई देते हुए कहा कि “हम डोकलाम पर पूरी नजर बनाए हुए है और वहां कुछ भी चिंताजनक नही है”। अपनी सफाई में बीजेपी ने डोकलाम में चीनी सेना की घुसपैठ पर चुप्पी साध रखी है। 

      विपक्ष ने जब डोकलाम विवाद पर मोदी सरकार पर सवाल उठाए तो बीजेपी ने विपक्ष को देश की सुरक्षा के पर राजनीति ना करने की नसीहत दे डाली। डोकलाम विवाद पर सरकार की चुप्पी के सवाल पैदा करती है। जिस डोकलाम को मोदी सरकार अपनी सबसे बड़ी कूटनीतिक जीत बता रही थी उसी डोकलाम में मोदी सरकार की करारी हार हुई है। 

      क्या देश की सरकार एक बार फिर चीन को लाल आंख नही दिख सकती ? क्या सरकार का यह फर्ज नही बनता की देश की जनता को सच्चाई बताए ? क्या विपक्ष को ऐसे मुद्दे पर सवाल पूछने का हक भी नही है ?

      डोकलाम विवाद पर मोदी सरकार की चुप्पी देश की जनता के साथ धोका है।