Newbuzzindia: जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी(जेएनयू) में कथित तौर पर देश विरोधी नारे लगाने के मामले में आरोपी स्टूडेंट उमर खालिद और कन्हैया कुमार के खिलाफ हुई कार्रवाई का जेएनयूएसयू ने विरोध करने का फैसला किया है। जेएनयूएसयू प्रेजिडेंट कन्हैया ने कहा कि हम इस रिपोर्ट को खारिज करते हैं, क्योंकि यह एकतरफा जांच पर आधारित है और हमें अभी तक रिपोर्ट भी नहीं दी गई है।

उल्लेखनीय है कि उच्च स्तरीय जांच कमिटी की रिपोर्ट पर जेएनयू ने कार्रवाई करते हुए उमर को एक सेमेस्टर के लिए निष्कासित कर 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। उमर के अलावा कन्हैया पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इस मामले के अन्य आरोपी अनिर्बान को 15 जुलाई तक के लिए निष्कासित किया गया है। इसके बाद 25 जुलाई से अगले पांच साल के लिए अनिर्बान को जेएनयू कैंपस से बाहर किए जाने का फैसला किया गया है जिसके तहत वह जेएनयू के किसी भी कोर्स में एडमिशन नहीं ले सकेंगे।

जेएनयूएसयू की वाइस प्रेजिडेंट शहला राशिद ने कहा कि कमिटी ने बयान एक पक्ष से लिए और हमारे बार-बार कहने पर भी सही तरीके से जांच नहीं की गई। सभी छात्र निर्दोष और बहुत गरीब पृष्ठभूमि से आते हैं। ये सभी कार्यकर्ता हैं और यह सरकार के खिलाफ हो रहे आंदोलन को कुचलने की साजिश है। कन्हैया ने कहा कि हमारी जनरल बॉडी की मीटिंग में छात्रों ने कमिटी की रिपोर्ट के खिलाफ प्रस्ताव भी पारित किया है। हम इसके खिलाफ अपना आंदोलन जारी रखेंगे।

इधर, एबीवीपी के सौरभ शर्मा ने कहा कि उनके खिलाफ फैसला जेएनयू टीचर्स असोसिएशन के दबाव में लिया गया है। जेएनयूएसयू ने इसे लेकर रात में एक मीटिंग भी बुलाई, जिसमें आगे की कार्रवाई को लेकर चर्चा की गई।

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