जोश-जोश में योगी आदित्यनाथ कर बैठे कुछ ऐसा काम कि होना पड़ा शर्मसार !

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Newbuzzindia : उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री पद संभाले अभी याेगी अादित्यनाथ काे एक सप्ताह भी नहीं हुअा है कि वह बड़ी मुश्किल में फंसते नजर अा रहे हैं। उन्हाेंने शुक्रवार काे एक बड़ी गलती कर दी है। इस गलती के चलते वह मुश्किलाें में पड़ते नजर अा रहे हैं। 

दरअसल योगी अादित्यनाथ शुक्रवार काे लखनऊ के ट्रामा सेंटर में एक गैंगरेप पीडि़ता से मिलने पहुंचे थे। पीड़िता का हालचाल जानने के बाद उन्हाेंने अपने ऑफिशियल ट्विटर एकाउंट पर मुलाकात की फाेटाे पाेस्ट कर दी, जिससे रेप पीड़िता की पहचान उजागर हाे रही है।

ट्रेन से रायबरेली से लखनऊ आ रही एक गैंग रेप विक्टिम को तेजाब पिलाने की कोशिश की गई। विरोध करने पर उसके चेहरे पर एसिड फेंक दिया गया। इस घटना के बाद उसे लखनऊ के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है, जहां शुक्रवार को सीएम योगी आदित्यनाथ ने पीड़िता से मुलाकात की।

योगी के मुलाकात करने के कुछ देर बाद उनके ऑफिशियल ट्विटर हैंडल से दो फोटो शेयर की गई। इन फोटो में सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन को ध्यान न रखते हुए रेप विक्टिम और उसके परिवार की पहचान उजागर कर दी गई। नियम है कि बलात्कार के मामले में पीड़ित महिला और उसके परिवार की पहचान ना बताई जाए। ये सुप्रीम कोर्ट का आदेश है।

योगी के इस ऑफिशियल ट्विटर है्ंडल  @myogiadityanath से यह ट्वीट किया गया है। इसमें लिखा है- ”आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ट्रॉमा सेंटर में एसिड अटैक पीड़िता से मिले और बोले- जल्द होगी उचित कार्यवाही।” साथ ही इसमें दो फोटो भी एटैच किए गए, जिसमें यूपी सरकार की कैबिनेट मंत्री रीता जोशी और रेप विक्ट‍िम साफ नजर आ रहे हैं। साथ ही रेप विक्ट‍िम का परिवार भी इस तस्वीर में नजर आ रहा है।

योगी आदित्यनाथ के पास पहुंची उनके ही अपराधों की फाइल, पुलिस ने मांगी कार्यवाई की इजाज़त

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Newbuzzindia :उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर कई दर्जन अपराधिक मामले अदालतों में चल रहे है। लेकिन अब उनके ही मंत्रालय में उनके ही अपराधों की फाइल पहुंची हैं। पुलिस ने उन आरोपियों पर आधिकारिक मुकदमा चलाने की इजाजत मांगी है जिसमें खुद योगी आदित्यनाथ भी आरोपी हैं।

इसके बाद पुलिस ने मंत्रालय से आदित्यनाथ समेत गोरखपुर के एम.एल.ए. राधामोहन दास अग्रवाल और भाजपा के राज्य सभा सांसद शिवप्रताप शुक्ला पर आईपीसी की धारा 153-A (धर्म के आधार पर दो समुदायों के बीच हिंसा भड़काने) के तहत चार्जशीट दायर करने की अनुमती मांगी है। यह मामला दस साल पहले गोरखपुर में हुई साम्प्रदायिक हिंसा से जुड़ा है।

खबरों के मुताबिक, महिला से छेड़छाड़ होन के बाद, आरोपी लड़कों का कुछ दूर तक पुलिस ने पीछा किया था लेकिन लड़के मोहर्रम के जुलूस का फायदा उठाकर भीड़ में शामिल गए। इसी बीच मोहर्रम के जुलूस में फायरिंग भी हुई जिसमें कुछ लोग घायल हुए। इसके बाद दो समुदायों के बीच हिंसा फैल गई थी।

इसके बाद परवेज परवाज नाम के एक पूर्व पत्रकार ने एफआईआर दर्ज कराने की कोशिश की थी, लेकिन पुलिस ने ऐसा करने से मना कर दिया। बाद में हाईकोर्ट मामले में दखल दिया तब जाकर 26 सिम्बर 2008 को एफआईआर दर्ज हुई।

एफआईआर के मुताबिक, योगी आदित्यनाथ पर आरोप है कि उन्होंने दो समुदायों के बीच हिंसा भड़काया और उन्हें आपस में लड़ाने के लिए भड़काऊ भाषण दिए। उसके बाद उन्होंने हिंदू युवक की मृत्यु के बदले की बातें कही थीं।

वहीं दूसरी तरफ पत्रकार परवेज का दावा है कि उसके पास मुख्यमंत्री आदित्यनाथ के कथित रूप से दिए गए भड़काऊ भाषण की वीडियो फुटेज है जिसे उन्होंने कर्फ्यू लगने दौरान दिया था।

परवेज का यह भी दावा है कि आदित्यनाथ के साथ उस समय गोरखपुर के एम.एल.ए. राधामोहन दास अग्रवाल, भाजपा के राज्यसभा सांसद शिवप्रताप शुक्ला के अलावा शहर के मेयर अंजु चौधरी और पूर्व भाजपा एमएलसी वाय. डी. सिंह भी मौजूद थे।

सरकार की लापरवाही की वजह से लीक हुई आपकी गोपनीय जानकारी।

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अगर आपका नाम, पता, आधार कार्ड नंबर, डेट ऑफ बर्थ और अकाउंट नंबर कोई जान ले, वो भी एक गूगल सर्च के जरिए. हैरानी की बात है, लेकिन ऐसा हो रहा है. देश के हजारों नागरिकों की ये पर्सनल जानकारियां गूगल पर आसानी से उपलब्ध हैं और वो भी सरकारी वेबसाइट के जरिए.

मानव संसाधन विकास मंत्रालय की वेबसाइट से ऐसे डेटा ऐक्सेल शीट आसानी से गूगल के जरिए डाउनलोड की जा सकती है. आप इसे चूक करें या लापरवाही, लेकिन इतने नागरिकों का घर तक का पता किसी के पास भी हो सकता है.

St Hill नाम के एक ट्विटर यूजर ने इस ओर ध्यान आकर्षित किया है कि आधार कार्ड का गलत इस्तेमाल कैसे हो सकता है. या यों कहें की हो रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक सिक्योर रखे जाने वाले इन पर्सनल जानकारियों की लिस्ट Ms. Excel शीट में गूगल के जरिए आसानी से डाउनलोड करने को उपल्बध हैं. इन डेटा में लगभग हजारों नागरिकों के पैन कार्ड नंबर, जाती और धर्म की जानकारियां आसानी से मिल जाएगी.

हालांकि ये डेटा आधार की वेबसाइट से नहीं लीक हो रहे,बल्कि केंद्र सरकार की दूसरी वेबसाइट्स से डाउनलोड के लिए उपलब्ध हैं. दरअसल सरकार की कुछ स्कीम में इन डेटा की जरुरत होती है और इसकी एक्सेल शीट मेंटेन की जाती है. लेकिन ये सभी जानकारियां मंत्रालयों के लिए ही होती हैं. लेकिन ये डेटा फिलहाल आम पब्लिक के लिए डाउनलोड के लिए उपलब्ध है जो बड़े सवाल खड़ा करता है. 

क्या आधार नंबर को पब्लिक करना सही है? 
आधार ऐक्ट 2016 के मुताबिक किसी नागरिक का आधार डेटा पब्लिश नहीं किया जा सकता. यानी मंत्रालय की वेबसाइट इन डेटा को सिक्योर रखने में नाकामयाब हो रही हैं.

आधार ऐक्ट 2016 के तहत कलेक्ट किया गया कोई भी आधार नंबर या कोर बायोमैट्रिक इनफॉर्मेशन पब्लिक नहीं किया जा सकता और न ही इसे किसी पब्लिक प्लैटफॉर्म पर पोस्ट किया जा सकता है. हालांकि इसके इस्तेमाल कानून के तहत शामिल की गईं एजेंसियां और संस्थाएं कर सकती हैं.

दी वायर की एक रिपोर्ट के मुताबिक एक महीने पहले डेटा रिसर्चर श्रीनीवास कोडाली ने थर्ड पार्टी वेबसाइट के द्वारा गलती लीक किए गए 5-6 लाख लोगों के पर्सनल डेटा के बारे में बताया था. इस डेटा में आधार नंबर, नाम, कास्ट, जेंडर और फोटोज शामिल थे. 

UNO की रिपोर्ट में हुई मनमोहन सरकार की तारीफ और मोदी सरकार की आलोचना !

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Newbuzzindia : भारत मानव विकास सूचकांक (एचडीआई) में दुनिया के 188 देशों की सूची में 131वें स्थान पर है। संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट में यह कहा गया है। एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश भारत इस मामले में पाकिस्तान, भूटान और नेपाल जैसे दक्षिण एशियाई पड़ोसी देशों की श्रेणी में शामिल है। वर्ष 2015 की इस मानव विकास रिपोर्ट के अनुसार भारत की रैकिंग पिछले साल के बराबर ही है। हालांकि, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के मामले में चीन और भारत जैसे देशों को ही तरजीह मिल रही है। संयुक्त राष्ट्र की 2014 की मानव विकास सूचकांक रिपोर्ट में भी भारत 131वें पायदान पर था।

हालांकि, ताजा रिपोर्ट के अनुसार 63 प्रतिशत भारतीय 2014-15 में अपने जीवन-स्तर को लेकर ‘संतुष्ट’ बताये गये हैं। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम सालाना आधार पर रिपोर्ट जारी करता है। इसमें कहा गया है कि भारत का 131वां स्थान इसे ‘मध्यम मानव विकास’ श्रेणी में रखता है जिसमें बांग्लादेश, भूटान, पाकिस्तान, केन्या, म्यांमा और नेपाल जैसे देश शामिल हैं। भारत का एचडीआई रैंक मूल्य 2015 में 0.624 रहा जो 2010 में 0.580 था।

रिपोर्ट के मुताबिक इसमें जीवन प्रत्याशा 2015 में 68.3 रही तथा प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय 5,663 डालर रही। सुरक्षित महसूस करने की धारणा के आधार पर 69 प्रतिशत ने ‘हां’ में जवाब दिया। विकल्प की आजादी के मामले में 72 प्रतिशत महिला प्रतिभागियों ने संतुष्टि जतायी जबकि पुरूषों के मामले में यह 78 प्रतिशत था। रिपोर्ट के अनुसार भारत ने जीवन संतुष्टि के मामले में 1-10 के पैमाने पर 4.3 अंक प्राप्त किया।
बता दें मानव विकास सूचकांक (HDI) एक सूचकांक है, जिसका उपयोग देशों को “मानव विकास” के आधार पर आंकने के लिए किया जाता है। इस सूचकांक से इस बात का पता चलता है कि कोई देश विकसित है, विकासशील है, अथवा अविकसित है। मानव विकास सूचकांक (HDI) का इस्तेमाल किसी देश के मानव विकास के स्‍तर को प्रदर्शित करने के लिए किया जाता है। इसके जरिए किसी देश में बुनयादी मानवीय सुविधाओं की औसत प्राप्ति को मानव विकास सूचकांक (एचडीआई) द्वारा नापा जाता है।

मानव विकास सूचकांक का आकलन जीवन प्रत्याशा, शिक्षा का स्तर व प्रति व्यक्ति आय आदि के आधार पर किया जाता है। इसे सबसे पहले 1990 में पाकिस्तान के प्रोफेसर महबूब उल हक ने पेश किया। हालांकि इस सूचकांक पर कई सवाल भी उठे हैं। कई लोग इसे नहीं मानते।

योगी आदित्यनाथ के नाम फिल्म निर्देशक विनोद कापड़ी का खुला खत… जरुर पढिये!

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प्रिय आदित्यनाथ जी,

मेरा नाम विनोद कापड़ी है. अच्छा लगता है, इसलिए थोड़ी बहुत पत्रकारिता करता हूं और छोटी-मोटी फिल्में बनाता हूं. आपकी तरह एक हिंदू परिवार में मेरा जन्म हुआ है. आप ही की तरह उत्तराखंड का रहने वाला हूं और आप ही की तरह जाति से एक पहाड़ी राजपूत भी हूं. लेकिन पता है क्या? जब से आप उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री बने हैं, मैं थोड़ा डरा हुआ हूं. मैं जानता हूं कि अगर क्षेत्र, धर्म और जाति की बात करें तो मुझे आपके मुख्यमंत्री बनने पर बहुत खुशी होनी चाहिए. लेकिन मैं फिर भी डरा हुआ हूं.

मैं और मेरा परिवार पिछले 32 साल से उत्तरप्रदेश के ही बरेली और नोएडा में रह रहे हैं. हमारा वोट नोएडा में है और आपको बता दूं कि इस बार के विधानसभा चुनाव में मैंने और मेरे पूरे परिवार ने भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार को ही वोट दिया था. इसलिए कि पिछली दो सरकारों ने उत्तर प्रदेश को जिस तरह से लूटा, उसके बाद लगा कि उन्हें अब और लूट का मौक़ा नहीं मिलना चाहिए. कम से कम जो विकास की बात कर रहा है, उसे भी राज्य में एक मौक़ा दिया जा सकता है. लेकिन 18 मार्च को जैसे ही आपके नाम की घोषणा हुई तो यह सवाल मेरे सामने आ खड़ा हुआ – क्या हमारे साथ विश्वासघात हुआ है?

मेरी और आपकी उम्र तकरीबन बराबर ही है. जितने साल आपने राजनीति की है, उतने ही बरस मैंने पत्रकारिता की है. आपके चयन के बाद एक के बाद एक आपसे जोड़ी जाती रहीं कई घटनाएं मेरे सामने आने लगीं. मैं जानता हूं कि आरोप अब तक सिद्ध न हों उनकी बात करना ठीक नहीं पर आपकी जिस तरह की राजनीति रही है, उसके लिए तो किसी सबूत की जरूरत नहीं है. वो तो आप खुलेआम करते रहे हैं और डंके की चोट पर कहते रहे हैं कि अगर कोई एक हिंदू को मारेगा तो आपकी सेना उस समुदाय के सौ लोगों को मारेगी. आपके समर्थक तो इससे कई क़दम आगे निकल जाते हैं, जब वे कहते हैं कि क़ब्र खोदकर औरतों का बलात्कार किया जाएगा और यह सब होगा हिंदुओं और हिंदुत्व को बचाने के लिए.

मन में खयाल आया कि कहीं इस तरह की बातें करने वालों से लूटने वाले ही तो ठीक नहीं थे! मुझे समझ नहीं आ रहा था कि ये हो क्या रहा है!

आदित्यनाथ जी, आपके नाम की घोषणा के वक्त ये सबकुछ मेरी आंखों के सामने घूमने लगा. अभी मैं यह सोच ही रहा था कि टीवी पर आपके एक समर्थक को लखनऊ से कहते सुना – यूपी में रहना है तो योगी-योगी कहना होगा. क्यों कहना होगा भाई? कोई ज़बरदस्ती है क्या? ये मेरी आस्था और निजता का सवाल है. मेरा जब मन होगा, मैं कहूंगा. और नहीं कहूंगा तो यूपी में नहीं रह पाऊंगा क्या? मन में खयाल आया कि कहीं इस तरह की बातें करने वालों से लूटने वाले ही तो ठीक नहीं थे! मुझे समझ नहीं आ रहा था कि ये हो क्या रहा है!

मेरे साथ मेरी पत्नी भी बैठी हुई थी. हम चर्चा कर रहे थे कि सोचो जब हम इतने सक्षम और हिंदू होते हुए भी इतने परेशान हैं तो दूसरे समुदाय के लोगों का क्या हाल होगा?

बचपन से हमने तो यही सुना था कि हिंदू कोई धर्म नहीं, जीवन पद्दति है, जीने का तरीका है. इंसान को इंसान से प्यार करना है. सुख-दुख में हाथ बंटाना है. पर वह कौन सी जीवन पद्धति है जिसमें आदमी मृत महिलाओं के शवों को क़ब्र से निकालकर उनके साथ बलात्कार करने की बात करता है? बोलना तो दूर कोई ऐसी घृणित बात सोच भी कैसे सकता है!

मैं जानता हूं कि ये आपने नहीं कहा था पर आपके प्रभाव में रहने वाले लोगों ने तो कहा था. मुझसे कोई कह सकता है कि जब मेरे या मेरे परिवार के क़त्लेआम की बात ही नहीं हुई है तो मैं क्यों डर रहा हूं? पर मेरे ख़्याल से मुद्दा यह नहीं है. मेरे लिए मुद्दा यह है कि क़त्ल करने और बलात्कार की बात की ही क्यों गई? अगर किसी ने कोई अपराध किया है तो क़ानून है ना हमारे पास. वह भी तो अपना काम कर सकता है. हम कौन होते हैं ये कहने वाले कि हम सौ मार डालेंगे? हम मृत के साथ रेप करेंगे.

और आप तो वैसे भी संन्यासी हैं, गुरू हैं , आपने दीक्षा हासिल की है, दुनिया को रास्ता दिखाते हैं. इतना तो आप भी समझते हैं कि नफ़रत का इलाज नफ़रत तो बिलकुल नहीं है.

मैं तो जिस परिवेश में पला-बढ़ा, वहां राम मेरा दोस्त है और रहीम मेरा भाई. राम का क़त्ल होने पर कोई मेरे भाई रहीम को मारेगा तो मुझे डर तो लगेगा ही आदित्यनाथ जी. मैं तो कह रहा हूं कि जिसने या जिस भीड़ ने राम को मारा, उसे क़ानून से सख़्त से सख़्त सज़ा मिलनी चाहिए लेकिन बिना असली क़ातिल को जाने हम खुद ही क़ानून हाथ में लेकर एक राम के बदले सौ बेक़सूर रहीम को मारने की बात करेंगे तो डर लगना स्वाभाविक है. सीमा को कोई एक भगा कर ले गया और उसके बदले में कोई सौ सबीना को भगाने की बात करेगा तो भी मुझे डर लगेगा ही आदित्यनाथ जी.

आपको पता नहीं होगा पर आपके नाम पर यकायक समाज के हर हिस्से में झुंड के झुंड पैदा हो गए हैं जो ये कहने लगे हैं कि अब पता चलेगा उन्हें भी. ये उन्हें कौन हैं आदित्यनाथ जी?

मेरे मोहल्ले का एक भी घर जलेगा, मेरे मोहल्ले से एक भी कोई मरेगा तो मुझे भी डर लगेगा ही. वे लोग नासमझ हैं जो समझते है कि दूसरे का घर जल रहा है. हमारे घर की दीवारें दशकों से सदियों से एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं. एक भी दीवार जलती है तो आग मेरे घर तक भी पहुंचेगी. इसलिए मेरे डर को समझिए आदित्यनाथ जी. कर्फ़्यू लगेगा तो खाने-पीने की दिक़्क़त मुझे भी होगी, हिंसा होगी तो मेरे बच्चे भी स्कूल नहीं जा पाएंगे, मुज़फ़्फ़रनगर जलेगा तो आंच नोएडा में भी आएगी. मैं इसीलिए डरा हुआ था आदित्यनाथ जी.

मैं ये भी जानता हूं कि पिछले कुछ दशकों में बहुत खतरनाक तुष्टिकरण हुआ है जिसने समाज और देश को इतना बांट दिया है. आप भी जानते हैं कि ये किन लोगों ने किया है और किस मक़सद से किया है. आप ये भी जानते होंगे कि इसके लिए मैं या मेरे जैसे ही रहीम या सबीना तो क़तई ज़िम्मेदार नहीं हैं. हम सब तो न तीन में हैं और न तेरह में लेकिन जब मारने और काटने की बात आती है तो हम ही सबसे पहले निशाने पर आते है. जो गुनाह राजनैतिक दलों ने किए उसकी सज़ा एक आम शहरी क्यों भुगते?

आदित्यनाथ जी, आपको पता नहीं होगा पर आपके नाम पर यकायक समाज के हर हिस्से में झुंड के झुंड पैदा हो गए हैं जो ये कहने लगे हैं कि अब पता चलेगा उन्हें भी. ये उन्हें कौन हैं आदित्यनाथ जी? ये भी तो मेरे समाज, मेरे गांव और मोहल्ले का हिस्सा ही हैं. फिर इस तरह से डराने और धमकाने वाले झुंड क्यों अचानक ऐसा बर्ताव कर रहे हैं? मैं इस बर्ताव से डरा हुआ हूं.

हो सकता है कि मेरी ये आशंकाएं बिलकुल निराधार साबित हों. हो सकता है कि मेरे सारे डर बेकार साबित हों. ये भी हो सकता है कि एक ज़िम्मेदार मुख्यमंत्री के तौर पर राजधर्म का पालन करते हुए आप मेरे जैसे तमाम डरे हुए लोगों को ग़लत साबित कर दें. यकीन मानिए मैं प्रार्थना करूंगा कि आप ऐसा ही करें. जिस दिन मेरी आशंकाएं गलत साबित होंगी, उस दिन मुझसे अधिक खुश और कोई नहीं होगा. उस दिन बिना किसी दबाव के मैं जय श्रीराम कहूंगा और मेरा भाई रहीम और मेरी बहन सबीना भी.

मेरी तरफ से शुभकामनाएं स्वीकार करें.

आपका,

विनोद कापड़ी

किसानों की कर्ज माफी से होगा 27420 करोड़ का नुकसानःSBI

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उत्तर प्रदेश में किसानों की कर्जमाफी से बैंकों को 27420 करोड़ रुपये का नुकसान होगा. इस संबंध में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यदि यूपी सरकार कर्जमाफी के फैसले पर आगे बढ़ती है तो बैंकों को नुकसान होगा. साथ ही अन्य राज्यों का वित्तीय गणित भी गड़बड़ा जाएगा. बता दें कि चुनाव से पहले प्रचार के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी और बीजेपी ने सरकार बनने की अवस्था में लघु और सीमांत किसानों के कर्जमाफी की बात की थी. रविवार को बीजेपी सरकार बनी और योगी आदित्यनाथ सीएम बने हैं.

रिपोर्ट में क्या है
एसबीआई की रिसर्च रिपोर्ट सोमवार को सामने आई. इसमें बताया गया है कि किसानों के ऊपर 86,241.20 करोड़ का यूपी में बकाया है. 2016 के आंकड़े के मुताबिक, औसतन देनदारी 1.34 लाख रुपए है.

यूपी की क्या है हालत?
रिपोर्ट में कहा गया है कि यूपी की बात करें तो 27,419.70 करोड़ कर्जमाफी करना होगा. ये लोन सभी बैंकों ने लघु और सीमांत किसानों को दिए हैं. आर्थिक सामाजिक और जातिगत जनगणना के मुताबिक यूपी में 40 फीसदी लोग कृषि में लगे हुए हैं. जमीन की बात की जाए तो 92 फीसदी होल्डिंग लघु और सीमांत किसानों के पास है.

रेवन्यू में आएगी कमी
रिपोर्ट में कहा गया है कि यूपी सरकार का कुल रेवन्यू 2016-17 में 3,40,255.24 करोड़ रहा है. और अगर 27,419.70 करोड़ इससे निकाल दिया जाएगा तो यह कुल रेवन्यू का 8 फीसदी होगी. रिपोर्ट में कहा गया है कि जन धन स्कीम के चलते यूपी में ज्यादातर लोगों के बैंक अकाउंट खुल गए हैं. लेकिन इसमें से कुछ ही हैं जो किसानी करते हैं या फिर किसानी में बैंकिंग का फायदा लेते हैं.

बनेगी देश की सबसे बड़ी टेलिकॉम कंपनी, वोडाफोन इंडिया और आइडिया सेल्युलर के विलय का ऐलान।

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कुमार मंगलम बिड़ला के स्वामित्व वाली देश की तीसरे नंबर की टेलिकॉम कंपनी आइडिया सेल्युलर ने वोडाफोन इंडिया के साथ विलय का ऐलान कर दिया। कंपनी ने सोमवार को बताया कि उसके बोर्ड ने इस विलय-प्रस्ताव पर मुहर लगा दी। इसके तहत वोडाफोन इंडिया और इसके पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी वोडाफोन मोबाइल सर्विसेज लिमिटेड और आदित्य बिड़ला ग्रुप के आइडिया सेल्युलर का विलय हो जाएगा और नई कंपनी भारती एयरटेल को पछाड़कर देश की सबसे बड़ी टेलिकॉम कंपनी बन जाएगी।

आज के ऐलान के मुताबिक, आइडिया और वोडाफोन की विलय प्रक्रिया अगले साल पूरी हो जाएगी। नई कंपनी में वोडाफोन की हिस्सेदारी 45 प्रतिशत जबकि आइडिया की हिस्सेदारी 26 प्रतिशत होगी। आगे जाकर आदित्य बिड़ला ग्रुप और वोडाफोन का हिस्सा बराबर हो जाएगा। आइडिया का वैल्युएशन 72,200 करोड़ रुपया आंका गया है। फाइलिंग के मुताबिक, एबी ग्रुप के पास 130 रुपये प्रति शेयर की दर से नई कंपनी के 9.5 प्रतिशत खरीदने का अधिकार होगा। शुरुआती कारोबार में 15 प्रतिशत उछले आइडिया के शेयर बीएसई पर सुबह 10.16 बजे 4.8% नीचे आ गए थे।

ब्रोकरेज कंपनी सीएलएसए की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नई कंपनी का रेवेन्यू 80,000 करोड़ से भी ज्यादा का होगा जो देश की टेलिकॉम इंडस्ट्री के कुल रेवेन्यू का 43 प्रतिशत होगा। इसके साथ ही, नई कंपनी के पास भारतीय बाजार के कुल 40 प्रतिशत मोबाइल सब्सक्राइबर्स होंगे। इतना ही नहीं, कुल आवंटित स्पेक्ट्रम का 25 प्रतिशत हिस्सा अकेले इसी कंपनी के पास होगा। ऐसे में इसे 1 प्रतिशत स्पेक्ट्रम बेचना होगा ताकि इसकी सीमा से जुड़े नियम का पालन हो सके।

पहले एक रिपोर्ट में इकनॉमिक टाइम्स ने अनुमान लगाया था कि कंसॉलिडेशन की वजह से टेलिकॉम इंडस्ट्री में 10,000 रोजगार कम हो सकते हैं। ये नौकरियां कई टेलिकॉम ऑपरेटर और इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनियों में खत्म हो सकती हैं। इस बीच, वोडाफोन ने ऐनुअल ऑफसाइट को टाल दिया है, जिसे मार्च महीने की शुरुआत में फाइन किया जाता है और यह अप्रैल के आखिर में होता है। कुछ ब्रैंड और मार्केटिंग खर्चों को भी रोक दिया गया है।
विलय में वोडाफोन और आइडिया के सभी शेयरों का विलय होगा, लेकिन इंडस टावर्स में वोडाफोन के 42 प्रतिशत शेयर इस विलय से अलग होंगे। आइडिया के नए शेयरों को वोडाफोन में जारी करने के साथ विलय लागू हो जाएगा और वोडाफोन इंडिया अपनी पैरंट कंपनी से अलग हो जाएगा। आइडिया और वोडाफोन के प्रमोटरों के पास तीन-तीन डायरेक्टर्स नामित करने के अधिकार होंगे। आइडिया जहां चेयरमैन पद के लिए अपनी नॉमिनी देगा, वहीं वोडाफोन की ओर से सीएफओ पद पर नॉमिनी देने का अधिकार होगा जबकि सीईओ और सीओओ के पद दोनों कंपनियों के साझी सहमति के बाद निर्धारित होंगे।

देश के टेलिकॉम मार्केट में पिछले साल आई कंपनी रिलायंस जियो बड़ी तेजी से पांव जमा रही है। कंपनी ने पहले वेलकम ऑफर और फिर हैपी न्यू इयर ऑफर के तहत फ्री वॉइस और डेटा सर्विसेज देकर बड़े पैमाने पर ग्राहकों को जोड़ने में कामयाब रही है। तब से देश के टेलिकॉम मार्केट में हलचल मची है। पिछले महीने भारती एयरटेल ने भी शेयर बाजार को सूचित किया था कि वह नॉर्वे की कंपनी टेलिनॉर की भारतीय इकाई के ऐसेट्स खरीदेगा।

मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ को पिता से मिली यह नसीहत !

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Newbuzzindia : उत्तर प्रदेश में नवनियुक्त मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को उनके पिता आनंद सिंह विष्ट ने सर्वधर्म सम्भाव की भावना और किसी से भेदभाव न करने की नसीहत दी है। वन क्षेत्राधिकारी के पद से रिटायर हुए आनंद सिंह बिष्ट से जब पूछा गया कि वह अपने बेटे से क्या कहना चाहते हैं तो रुंधे गले से उन्होंने कहा कि मैंने उसे समझाया कि सर्व सम्भाव रखो।
उन्होंने कहा कि महंत अवैद्यनाथ के लक्षण योगी में भी आ गए हैं। मैंने उस से कहा है कि अब तुम बड़े पद पर हो। क‍िसी से बुरा व्यवहार न करो। मुसलमानों से भेदभाव न करो। उन्होंने कहा कि सबको साथ लेकर चलना होगा, मुंह बंद रखना होगा, कई बार वे कुछ ज्यादा कड़वी बात बोल जाते हैं।
आनंद स‍िंह बिष्ट ने कहा, आज मैं बहुत खुश हूं। मुझे अपने बेटे पर गर्व है। बच्चे अपनी इच्छा से ही काम करें, तो वही ठीक है। इससे पहले आज योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली ।
इस अवसर पर कई राज्यो के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह, वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी, सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव, पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, केंद्रीय मंत्री उमा भारती सहित बीजेपी के कई कद्दावर नेता मौजूद रहे।

अनोखा मंदिर! यहां भगवान के दर्शन से डरते हैं लोग, करते हैं सिर्फ पीठ की पूजा

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मंदिरों में देवी-देवताओं के दर्शन-पूजन की परंपरा तो सब जगह प्रचलित है, लेकिन उत्तराखंड में एक ऐसा भी मंदिर है जिसमें भगवान के चेहरे के बजाय उनकी पीठ के दर्शन किए जाते हैं। उत्तरकाशी के छोटे-से कस्बे नैटवाड़ में भगवान पोखूवीर का मंदिर है। इस इलाके में पोखूवीर को न्याय का देवता माना जाता है। लोगों की मान्यता है कि जो भी उनसे न्याय मांगता है, वे बिल्कुल सही और निष्पक्ष इंसाफ करते हैं, लेकिन उनके मुख के दर्शन नहीं किए जाते।

लोगों की आस्था इनसे गहराई तक जुड़ी है। पुराने समय में जब लोगों को निष्पक्ष न्याय नहीं मिलता था या जब वे न्याय प्रणाली को अपनाना पसंद नहीं करते थे, तो पोखूवीर से इसकी गुहार करते थे। लोगों का कहना है कि जो दोषी होता है, उसे पोखूवीर किसी भी रूप में दंड दे सकते हैं। 

यहां पोखूवीर से जुड़ी अनेक कथाएं भी प्रचलित हैं। कहा जाता है कि बहुत प्राचीन समय में जब किरिमर दानव ने इस इलाके में आतंक मचाया तो जनता की रक्षा के लिए राजा दुर्योधन ने उससे युद्ध किया। युद्ध में दानव हार गया और दुर्योधन ने उसकी गर्दन काटकर टोंस नदी में फेंक दी।

किरिमर दानव का सिर प्रवाह की दिशा के बजाय उलटा बहने लगा। जहां रूपिन और सूपिन नदी का संगम आता है, वहां ये नैटवाड़ में ये रुक गया। राजा दुर्योधन ने जब किरिमर दानव के सिर को देखा तो उसे नैटवाड़ में ही स्थापित कर दिया और यहीं उसका मंदिर बना दिया। आज यह पोखूवीर के नाम से जाना जाता है।

मंदिर से एक और कथा भी जुड़ी है। कहते हैं कि यह दानव नहीं बल्कि वभ्रूवाहन था। कृष्ण ने महाभारत के युद्ध से पूर्व ही उसका शीश काट दिया था। इस इलाके की खासियत है कि यहां कई स्थानों पर कौरवों की पूजा होती है। यहां तक कि दुर्योधन का मंदिर भी है। एक अन्य मंदिर में कर्ण की पूजा की जाती है।

दु:खद: हर साल 100 से ज्यादा जवान कर रहे है आत्महत्या।

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देश के सैनिकों का एक दु:खद सच यह भी है कि हर साल 100 से ज्यादा जवान आत्महत्या कर लेते हैं। साल 2016 में विभिन्न परिस्थितियों में 125 जवानों ने आत्महत्याएं कीं। शुक्रवार को लोकसभा में एक सवाल का जवाब देते हुए रक्षा राज्य मंत्री सुभाष भामरे ने कहा, ‘101 सैनिक, 19 एयरमैन और 5 नाविकों ने पिछले साल आत्महत्याएं कीं।’ इस के अलावा साथी जवानों की हत्याओं के भी 3 गंभीर मामले सामने आए।

इस साल 13 आर्मी जवान आत्महत्याएं कर चुके हैं। इसी तरह एयरफोर्स से भी 2 ऐसे मामले संज्ञान में आए हैं। दुर्गम इलाकों में देश की सेवा के लिए तत्पर सैनिक तनाव के चलते आत्महत्या कर रहे हैं।

भामरे ने बताया, ‘सरकार ने दिक्कतों को दूर करने की दिशा में कई कदम उठाए हैं। इनमें गुजर-बसर की स्थिति, बेहतर रहन-सहन और परिजनों को भी सेवाओं का लाभ शामिल है।’ बताया गया कि तनाव मिटाने के लिए योग व मेडिटेशन कार्यक्रमों की भी शुरुआत की गई है।

वह कहते हैं, ‘बड़ी संख्या में अफसरों को जवानों व उनके परिजनों की काउंसलिंग के लिए लगाया जाता है। इस के साथ-साथ बाहर के मनोवैज्ञानिकों की भी इस मुहिम में मदद ली जा रही है।’ एक अफसर ने बताया कि आजकल के दौर में जवानों का घर से मोबाइल फोन के जरिए सीधे जुड़े रहना, उनके भीतर कई बार तनाव पैदा कर देता है।

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