Newbuzzindia : सपा में चल रहे घमासान के बीच अखिलेश यादव ने प्रियंका गांधी से मुलाकात की है । मुलाकात में कांग्रेस और सपा के बीच गठबंधन पर बात की गई ।गठबंधन की राह में रोड़ा बनाने वाली ताकतें कमजोर हो गई हैं। राज्य में चुनाव की घोषणा के तत्काल बाद चुनावी समझौते का ऐलान हो सकता है।
सपा और कांग्रेस के बीच बनने से पहले ही बिखरने की आशंका में डूब रहे चुनावी गठबंधन को अखिलेश की मजबूती का सहारा मिल गया है। अखिलेश यादव को सियासी मजबूती मिली तो गठबंधन के सहयोगियों के बांछें खिल गई हैं। लेकिन फिलहाल कोई भी दल खुलकर कुछ बोलने से बच रहा है। लेकिन माना जा रहा है कि चुनाव की घोषणा के साथ ही राज्य में चुनावी गठबंधन की कवायद तेज हो जाएगी। उसी समय इसकी घोषणा हो सकती है।

समाजवादी पार्टी के नेता व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के चुनावी गठबंधन के बयान के बाद राजनीतिक अटकलों का बाजार गरमा गया था। लेकिन गठबंधन के आकार लेने के पहले ही सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने यह कहकर हवा निकाल दी कि समाजवादी पार्टी अकेले दम पर चुनाव लड़ेगी। उसका किसी दल से कोई समझौता नहीं होगा। इसके बावजूद कांग्रेस समेत अन्य छोटे दलों को अखिलेश यादव पर गठबंधन के बनाये जाने पर पूरा भरोसा था।

पिछले एक पखवारे से समाजवादी पार्टी के भीतर मचे घमासान को लेकर गठबंधन की संभावनाएं क्षीण होने लगी थीं। लेकिन सपा की कलह अपने चरम पर पहुंच गई और पार्टी की कमान अखिलेश यादव के हाथों में पहुंच गई है। मुलायम सिंह यादव को नये राष्ट्रीय अधिवेशन का आयोजन कर हाशिये पर डाल दिया गया है। इसके बाद अखिलेश यादव अपने मनमाफिक फैसला लेने को स्वतंत्र हो गये हैं। इससे संभावित गठबंधन के सहयोगी दलों को पूरी उम्मीद बंध गई है।

सपा के साथ कांग्रेस और राष्ट्रीय लोकदल के समझौते की उम्मीद को बल मिला है। इन दलों के एक साथ आ जाने से राज्य में मुस्लिम मतों के बीच होने वाले बिखराव को रोका जा सकता है। सपा के दोफाड़ होने के बाद कांग्रेस के नेता गठबंधन को खारिज नहीं कर रहे हैं। कांग्रेस की ओर से कहा गया है कि उनकी पार्टी प्रदेश की सभी 403 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयार है। हालांकि केंद्रीय नेतृत्व के स्तर पर अभी दोनों ओर से कोई वार्ता नहीं हो पाई है।

सपा की ओर से पिछले सप्ताह लगभग चार सौ सीटों पर अपने प्रत्याशियों के नाम की घोषणा के बाद कांग्रेस गठबंधन न होने की संभावना से निराश जरूर थी। लेकिन समाजवादी पार्टी के भीतर की कलह के निर्णायक मोड़ तक पहुंचने से उसके गठबंधन के हितैषियों के चेहरे खिल गये हैं। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के लगातार संपर्क में रहते हैं। उनकी मानें तो सपा और कांग्रेस के बीच चुनावी समझौता होना लगभग तय है। इसमें कहीं कोई विवाद नहीं है। उन्हें पूरी उम्मीद है कि राज्य विधानसभा चुनाव में भाजपा को चुनौती के लिए गठबंधन पूरी ताकत से उतरेगा।